17 February 2019



प्रादेशिक
विजयवर्गीय ने चुनाव न लड़ने की जताई इच्छा
13-09-2013
प्रदेश के कद्दावर मंत्री और चुनावी मैनेजमेंट के माहिर खिलाड़ी कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का बयान देकर सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा कि वे बेटे आकाश को उसके जन्मदिन पर अपनी राजनीतिक विरासत का तोहफा देना चाहते हैं। वे खुद अब पर्दे के पीछे रहकर पार्टी और संगठन के लिए कार्य करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह एक पिता का फैसला है, निर्णय तो पार्टी को ही करना है।

सुबह जैसे ही श्री विजयवर्गीय के फेसबुक और ट्वीटर पर किए गए पोस्ट की जानकारी फैली तो इंदौर और प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। चुनावी मैनेजमेंट में माहिर माने जाने वाले विजयवर्गीय की गिनती व्यापक जनाधार वाले नेता के रूप में होती है। विधानसभा चुनाव में महू जैसी मुश्किल सीट को जीतने के बाद उन्होंने भाजपा को उपचुनाव में उन सीटों पर भी जीत दिलवाई जो कांग्रेस का गढ़ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें प्रदेश भाजपा के भावी मुखिया के रूप में देख रहे थे। ऐसे में विजयवर्गीय के चुनाव नहीं लड़ने के बयान ने सभी को चौंका दिया।

संगठन के लिए काम करना चाहता हूं

राजनीतिक सरगर्मी के बीच विजयवर्गीय महू के आशापुरा स्थित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे। बाद में उन्होंने चर्चा में बताया कि वे खुद अब पर्दे के पीछे रहकर संगठन के लिए काम करना चाहते हैं। राजनीति की कमान बेटे आकाश को सौंपना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि अब धार्मिक और सामाजिक कार्यो में लगे रहें। मंत्री ने यह भी कहा कि उनका मन अब विधानसभा व लोकसभा चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने के लिए संगठन में काम करने का है।

यह राय मेरी, फैसला पार्टी करेगी

जब उनसे पूछा गया कि क्या आप कोई चुनाव नहीं लडें़गे। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि यह पार्टी को तय करना है। पार्टी जैसा आदेश करेगी मैं वैसा ही काम करूंगा। यदि पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा तो वे चुनाव जरूर लडें़गे।

अभी पार्टी को अवगत नहीं करवाया

विजयवर्गीय ने बताया कि यह उनकी और एक पिता की निजी राय है। सोशल नेटवर्किग साइट पर कोई भी व्यक्ति अपनी निजी राय जाहिर कर सकता है, मैंने भी की है। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपनी राय से क्या पार्टी नेताओं को अवगत करवाया है तो उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा कि जब पार्टी प्लेटफॉर्म पर बात बताना होगी तब मैं यह बात वहां भी रखूंगा।

श्री विजयवर्गीय ने फेसबुक पर किए गए पोस्ट में लिखा है \'मैं परिवार के आग्रह पर बीती रात 11.30 बजे घर पहुंचा। माताजी और परिजन के साथ बैठकर बातचीत कर रहा था, तभी बाहर से ढोल-नगाड़ों की आवाज सुनाई दी। बाहर झांककर देखा तो सैकड़ों युवाओं का हुजूम बेटे आकाश को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचा था। आतिशबाजी और रंग-गुलाल के बीच घर के बाहर होली और दीपावली जैसा माहौल बन गया। 16 से 25 वषर्ष के युवाओं का उत्साह देखकर मन में विचार आया कि आकाश की लोकप्रियता अच्छी है। अब समय आ गया है कि एक पिता को अपनी राजनीतिक विरासत बेटे को सौंपना चाहिए। रातभर इस पर विचार करने के बाद सुबह इस निष्कर्ष पर पहुंचा।\'Þ

इंदौर के नेताओं ने जताई अनभिज्ञता

विजयवर्गीय के इस नए पैंतरे को इंदौर के भाजपा नेता भी समझ नहीं पाए। भाजपा के संभागीय सम्मेलन में इकठ्ठा हुए वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग ने श्री विजयवर्गीय के इस निर्णय से अनभिज्ञता जाहिर की। सांसद सुमित्रा महाजन ने भी इस पर कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि हम इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। लगभग इसी तरह के बयान प्रदेश उपाध्यक्ष उषषा ठाकुर, खादी ग्रामोउद्योग के अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन आदि ने भी दिए।

ठाकुर के हाथ गब्बर ने फिर काट दिए

विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेस ने तीखी चुटकी ली। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लगता है एक बार फिर ठाकुर के हाथ गब्बर ने काट दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि मंत्री विजयवर्गीय कल तक तो कांग्रेस के ब़़डे--ब़़डे नेताओं को चुनाव में अपना सामना करने की चुनौती दे रहे थे, अब खुद ही मैदान छो़़ड रहे हैं।

लगता है वे महू की खतरे वाली सीट छो़़डकर क्षेत्र-दो या किसी सुरक्षित सीट से ल़़डना चाहते हैं। संभावना यह भी है कि बेटे को टिकट देने के लिए पार्टी पर दबाव बनाने के लिए यह हथकंडा अपनाया गया हो। श्री सलूजा ने कहा कि श्री विजयर्गीय दबाव की राजनीति करने में माहिर हैं। वे पार्टी पर दबाव बनाने के लिए ही इस तरह का पैंतरा खेल रहे हैं।

शहला मसूद हत्याकांड: जब्ती के गवाह माथुर ने दिया बयान

इंदौर। शहला मसूद हत्याकांड में गुरुवार को परिस्थिति जन्य साक्ष्य की सबसे अहम और मजबूत कड़ी जुड़ गई। जब्ती के गवाह मुकुल माथुर ने कोर्ट में खुलासा किया कि शाकिब डेंजर के घर की छत पर बने कबूतरखाने से उसी ने कट्टा निकाला था। वहां से तीन जिंदा कारतूस भी मिले थे।

ज्ञात हो फॉरेंसिक लैब, दिल्ली के डॉ. वीके महामात्र ने शाकिब के इस कट्टे, जिंदा कारतूस और शहला के गले में फंसे कारतूस का मिलान किया था। दोनों एक ही निकले थे। वहीं डॉ. एसके सिंगला ने शहला के दुप्पटे, खून से सने बुलेट और शहला के खून की जांच कर पाया था कि सभी मानव रक्त बी-ग्रुप के हैं, जो शहला का है।

सीबीआई विशेष न्यायाधीश अनुपम श्रीवास्तव के समक्ष आरोपी जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब डेंजर, ताबिश खान और इरफान अली को पेश किया गया। गवाह मुकुल माथुर ने बताया कि 25 मार्च 2012 को सीबीआई कार्यालय में करीब 11 बजे अधिकारियों ने उसके सामने आरोपी ताबिश के बयान लिए।

ताबिश ने कबूला था कि हत्या के बाद उसने कट्टा सुपारी किलर शाकिब डेंजर को दिया था। वहां जब्ती के गवाह श्री गंगवानी भी मौजूद थे। बाद में हम टीला जमालपुरा थाने के सदस्यों को लेकर शाकिब के घर गए और वहां सीबीआई ने तलाशी ली।

कबूतरों की आवाज से ध्यान गया

गवाह माथुर ने कहा कि सीबीआई अधिकारियों ने शाकिब का पूरा घर छाना। हम जाने लगे तभी कबूतरों की आवाज सुनी। मैं छत पर च़़ढा और कबूतरों के चबूतरे पर नजर प़़डी। वहां एक छोटा आलिया बना था। हाथ डाला तो एक पन्नी में पुराने पेपर में लिपटा हुआ कट्टा और तीन जिंदा कारतूस मिले। सीबीआई ने सीलबंद कप़़डे से कट्टा निकाला तो माथुर ने उसे पहचान लिया। एडवोकेट महेंद्र मौर्य के मुताबिक गवाह ने काली पल्सर की पुष्टि भी की। उसने यह कहा कि गा़़डी की टंकी पर कुछ स्क्रेच थे। एक इंडिका कार की जब्ती की पुष्टि भी की। आरोपी ताबिश की शिनाख्ती भी गवाह ने की।

बयान में अंतर

गवाह माथुर ने कोर्ट में कबूला कि जब्ती की कार्रवाई के बाद उसका मेमोरेंडम टीला जमालपुरा थाने में बनाया गया था जबकि गवाह ने सीबीआई को दिए 161 के बयान में कहा था कि जब्ती की कार्रवाई घटना स्थल शाकिब डेंजर के घर ही पूरी कर ली गई थी। समस्त पंचनामों पर भी सीबीआई ने जब्ती स्थल शाकिब का घर बताया।

एकसाथ होगा प्रतिपरीक्षण

एक दिन पहले आरोपियों के वकील सुनील श्रीवास्तव, सुनील सिम्बल व अन्य ने कोर्ट से सीबीआई जब्ती के गवाह जयप्रकाश गंगवानी और माथुर का मुख्य परीक्षण करवाने का निवेदन किया था। उसके बाद दोनों का प्रतिपरीक्षण एकसाथ किया जाएगा।

एडवोकेट श्रीवास्तव के अनुसार अलग-अलग प्रतिपरीक्षण होने से सीबीआई बाद में बचे हुए गवाह को प्रतिपरीक्षण की तैयार उसी हिसाब से करवा देती, जो सवाल हम करने वाले हैं। इसी कारण कोर्ट में आरोपी इरफान के वकील महेंद्र मौर्य के अलावा अन्य आरोपियों का एक भी वकील कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ।