19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
सीरिया समझौते से सबक ले ईरान
16-09-2013

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान को सीरिया के साथ हुए समझौते से सबक लेने की नसीहत दी है। ओबामा के अनुसार यदि ईरान यह सोच रहा है कि परमाणु हथियार बनाने पर उन्हें बख्श दिया जाएगा तो उसकी सोच गलत है। उन्हें चाहिए कि वे ऐसे ही किसी राजनयिक समाधान से शांति बरकरार रखने के बारे में सोचें। हमले की तैयारी से दबाव बनाकर हम ईरान से भी समझौता कर सकते हैं।

दूसरी ओर, सीरिया पर रूस और अमेरिका के समझौते पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों ने मुहर लगा दी है। फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेन फैबियस के साथ मुलाकात के बाद चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने समझौते का स्वागत करते हुए बीजिंग में कहा कि इससे सीरिया में तनाव कम करने में मदद मिलेगी। समझौते के बाद चीन की यह पहली प्रतिक्रिया है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने समझौते पर खुशी जतायी है।

ओबामा ने एक इंटरव्यू रविवार को बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी को पत्र लिखा है। उन्होंने यह नहीं बताया कि पत्र में क्या लिखा गया है। लेकिन, कहा कि अमेरिका के लिए सीरिया के रासायनिक हथियारों से बड़ा मुद्दा ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा है। ओबामा के मुताबिक व्लादिमीर पुतिन सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को बचा रहे हैं।

इसबीच, संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया का रासायनिक हथियार समझौते में शामिल होने का आवेदन स्वीकार कर लिया है। विश्व में सबसे बड़ा रासायनिक हथियारों का जखीरा रखने वाले सीरिया ने गुरुवार को आवेदन किया था। इसके तहत रासायनिक हथियारों के उत्पादन और भंडारण पर प्रतिबंध है। समझौते में शामिल होने वाले देशों को रासायनिक हथियारों के मौजूदा भंडार को नष्ट करना होता है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया, महासचिव ने सीरिया के इस कदम का स्वागत किया है। समझौते में शामिल होने के एक महीने बाद यह 14 अक्टूबर से प्रभावी हो जाएगा। इस बीच, अमेरिका के दो शीर्ष रिपब्लिकन सीनेटरों ने जॉन मैक्केन और लिंडसे ग्राहम ने समझौते की आलोचना करते हुए कहा है कि हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हमारे मित्र और विरोधी देश इसे अमेरिका की कमजोरी के रूप में देखेंगे।

इजरायल का डर आया सामने

यरुशलम। सीरिया द्वारा अपने रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व में सौंपने पर समझौता होने के बाद इजरायल को भी डर सताने लगा है। रूस ने कहा है कि सीरियाई रासायनिक हथियार इजरायल का जवाब था। इसके बाद से ही यहूदी राष्ट्र पर भी रासायनिक हथियारों को नष्ट करने का वैश्विक दबाव पड़ने लगा है। इजरायल ने कहा कि दूसरे देशों द्वारा रासायनिक हथियार संधि का अनुमोदन करने के बाद ही वह इसे मंजूर करेगा। इजरायल ने 1993 में संधि पर दस्तखत किए थे, लेकिन इसका कभी अनुमोदन नहीं किया। बावजूद इसके इजरायल संधि के क्रियान्वयन की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय इकाई रासायनिक हथियार निषेध संगठन में पर्यवेक्षक का दर्जा रखता है। वह इसकी कई बैठकों में भाग ले चुका है। परमाणु प्रसार विशेषज्ञों ने कहा है कि इजरायल ने नौ साल पहले ही परमाणु आयुधों का उत्पादन बंद कर दिया था। सीरिया और और उसके पड़ोसी देश मिस्त्र ने ही इजरायल का बहाना करते हुए संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। दोनों देशों की दलील है कि वे तभी इस संधि पर हस्ताक्षर करेंगे, जब पहले इजरायल परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करे और दिमोना में अपने परमाणु रिएक्टर को अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के लिए खोले।