19 February 2019



राष्ट्रीय
कार्यप्रणाली पर कठघरे में सीबीआइ
16-09-2013
राजनीतिक आकाओं के इशारे पर जांच एजेंसी की सक्रियता व निष्क्रियता को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा से जवाब-तलब किया है। आयोग जानना चाहता है कि आखिर कुछ मामलों में सीबीआइ ज्यादा सक्रिय क्यों हो जाती है, जबकि दूसरे कई मामलों में वह सालों चुपचाप बैठी रहती है। दरअसल, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह ने सीवीसी को पत्र लिखकर सीबीआइ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। पांच सितंबर को भेजे गए प्रकाश सिंह के ईमेल में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए सीवीसी प्रदीप कुमार ने सीबीआइ निदेशक से सफाई मांगी है। प्रदीप कुमार ने प्रकाश सिंह को कहा कि जल्द ही वह सीबीआइ निदेशक के जवाब से उन्हें अवगत कराएंगे। इंडिया रिजूवनेशन इनीशिएटिव की ओर से सीवीसी को लिखे पत्र में प्रकाश सिंह ने सीबीआइ पर गुजरात की फर्जी मुठभेड़ों की जांच में अति उत्साहित होने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार इस मामले में सीबीआइ की जांच साफ तौर पर राजनीतिक से प्रेरित दिखती है। वैसे 30 अगस्त को प्रकाश सिंह इन आरोपों से भरा पत्र सीबीआइ निदेशक को भी लिख चुके हैं। उनके अनुसार राजनीतिक आकाओं के इशारे पर सीबीआइ सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ मामलों में जानबूझकर कोई फैसला नहीं कर रही है। उन्होंने रेल घूसकांड में तत्कालीन रेलमंत्री पवन बंसल को क्लीन चिट देने के सीबीआइ के फैसले पर भी सवाल उठाया है। देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं।