16 February 2019



राष्ट्रीय
मुजफ्फरनगर हिंसा पीड़ितों ने सुनाई खौफनाक दास्तां
16-09-2013

मुजफ्फरनगर, [रवि प्रकाश तिवारी]। दंगाइयों ने मेरे सामने ही मेरे भाइयों का कत्ल कर दिया। शासन-प्रशासन ने कुछ नहीं किया, पीएम साहब इस सरकार को बर्खास्त कर दीजिए। बसीकलां के राहत शिविर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुखातिब होते ही नत्थू प्रधान कुरैशी के आंसू छलक पड़े। सोनिया महिलाओं के बीच पहुंचीं तो कुटबा गांव की महरू का दर्द छलक आया, मैडम, मेरे सामने ही पति को मार डाला, सात बच्चों को लेकर कहां जाऊं। पीड़ितों ने पीएम, सोनिया और राहुल को बताया कि किस तरह पुलिस-प्रशासन के सामने दंगाइयों ने उन्हें खींच-खींचकर मारा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे के ठीक एक दिन बाद सोमवार को मुजफ्फरनगर पहुंचे प्रधानमंत्री ने पीड़ितों से मुलाकात के बीच दंगों की विभीषिका से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को हर तरह की मदद का आश्वासन दिया।

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रविवार को जहां अखिलेश को दंगा पीड़ितों का विरोध झेलना पड़ा, वहीं सोमवार को भी प्रधानमंत्री के सामने पीड़ित प्रदेश सरकार पर खुलकर बरसे। सुबह शाहपुर हेलीपैड पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राज्यपाल बीएल जोशी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह सीधे बसीकलां गांव में बने प्रशासन के राहत शिविर में पहुंचे। यहां पर सभी नेताओं ने दंगा पीड़ितों से बातचीत कर उनका दर्द बांटने की कोशिश की। बच्चे, बुजुर्ग, युवा सभी हाथ जोड़कर, बिलखकर रोने लगे। इन्होंने चीख-चीखकर आरोप लगाया कि दंगा होता रहा, लोग मरते रहे और प्रशासन निष्क्रिय बना रहा। बहू-बेटियों की आबरू लूटी गई और घरों को आग के हवाले कर उन्हें भागने पर मजबूर किया गया। प्रधानमंत्री और राहुल ने पीड़ितों का ढांढस बढ़ाया। भरोसा दिलाया कि जल्द हालात सुधरेंगे।

सोनिया अपना सुरक्षा घेरा तोड़ पीड़ित महिलाओं के बीच जा पहुंची और एक-एक से हालचाल जाना। उन्होंने ने भी इन सभी को मुकम्मल सुरक्षा और इंसाफ का आश्वासन दिया। लगभग 35 मिनट तक यहां दुख-दर्द सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। हम पीड़ितों का दर्द बांटने आए हैं। राज्य सरकार को स्थिति सुधारने में केंद्र सरकार की ओर से हर मदद की जाएगी। साथ ही हिंसा के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

यहां से नेताओं का काफिला तावली कैंप में पहुंचा। यहां भी लोगों से मिलकर इन्होंने सांत्वना दी और न्याय का भरोसा दिलाया। यहां राहुल सुरक्षा घेरा तोड़कर पीड़ितों के पास पहुंच गए। शहर आने के क्रम में बीच सड़क पर गाड़ी रोककर पीएम, सोनिया और राहुल ने बहुसंख्यक समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनका पक्ष भी सुना। गांव बरवाला, सांझक मोड़ और बुढ़ाना मोड़ पर लोगों ने प्रदेश सरकार की निष्क्रियता और एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद पीएम का काफिला पत्रकार राजेश वर्मा के घर पहुंचा। राजेश की पत्‍‌नी, बच्चों और परिजनों से भेंट कर उनका ढांढस बढ़ाया। केंद्र सरकार की ओर से 10 लाख रुपये तथा दोनों बच्चों की पढ़ाई का खर्चा देने की घोषणा की गई। लगभग सवा दो घंटे बाद 12.30 बजे स्टेडियम से प्रधानमंत्री, सोनिया और राहुल गांधी ने दिल्ली तथा आरपीएन सिंह और राज्यपाल ने लखनऊ के लिए उड़ान भरी। लौटते वक्त सोनिया गांधी ने अफसरों से कहा कि अब प्रधानमंत्री दौरा कर लौट रहे हैं। बेहतरी सुनिश्चित करना आपका दायित्व है।

प्रधानमंत्री जी, नहीं रहना गांव में :

प्रधानमंत्री जी, अपने गांव में नहीं रहना..। कुछ कीजिए, हम वहां सुरक्षित नहीं हैं। कुछ भी करिए, क्योंकि उस गांव में जाने से अब डर लगता है। दंगे के कारण घर, परिवार छोड़कर शिविरों में रह रहे लोगों का दर्द इसी तरह छलका प्रधानमंत्री के सामने। तावली के राहत शिविर में शरण लिए अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों ने उन्हें बताया कि उन्हें पहले कभी इस तरह का डर नहीं महसूस हुआ।