19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
पाक में भूकंप से 327 की मौत
26-09-2013

क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को आए विनाशकारी भूकंप से भारी तबाही हुई है और मरने वालों की संख्या 327 पहुंच गई है। सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और संचार व्यवस्था ठप हो गई है। 2005 के बाद पाकिस्तान में आया यह सबसे भीषण भूकंप है, जिसमें 75 हजार लोग मारे गए थे।

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रिक्टर स्केल पर 7.7 तीव्रता वाले भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान बलूचिस्तान प्रांत के अवारन जिले में हुआ है। अवारन के उपायुक्त अब्दुल रशीद गोगाजई ने बताया कि जिले में अभी तक 208 लोगों के शव बरामद हुए है। जबकि 400 से ज्यादा घायल हैं। पड़ोसी जिले केच से भी 42 शव मिले हैं।

अधिकारियों ने दूरदराज के उन इलाकों में बहुत से लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई है जहां दुर्गम रास्तों के कारण बचाव दल बुधवार को पहुंच पाया है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक भूकंप से तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बहुत से लोगों तक अभी भी खाना और पीने का पानी नहीं पहुंच पाया है। एक हजार से अधिक सेना और फ्रंटियर कॉ‌र्प्स के कर्मी राहत कार्यो में लगे हैं। अधिकारियों के मुताबिक भीषण गर्मी के कारण हालात और बिगड़ गए हैं।

बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता जान बुलेदी ने यहां पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है। घायलों के उपचार के लिए स्थानीय अस्पतालों में जगह नहीं है। हम गंभीर रूप से घायल लोगों को हेलीकॉप्टर से कराची भेज रहे हैं। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री अब्दुल मलिक बलूच ने मंगलवार को अवारन और पांच अन्य जिलों में आपातकाल की घोषणा की थी। अवारन जिले के निवासियों का कहना है कि भूकंप से सरकारी इमारतों, अस्पताल और स्कूलों की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है।

15 साल में तीसरी बार बना टापू : भूकंप इतना भीषण था कि ग्वादर तट के पास अरब सागर में 40 वर्ग फीट का एक टापू बन गया है। राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिफिक आफिसर डॉ. आसिफ इनाम ने कहा, यह टापू भूकंप आने के बाद बना। यह समुद्रतट से करीब डेढ़ किमी दूर है। 15 साल में यह तीसरा मौका है जब बलूचिस्तान के तट पर टापू बना है। इससे पहले 1999 और 2011 में मकरन तट से दो किमी दूर जहां पर हिंगोल नदी समुद्र में मिलती है वहां पर टापू बने थे। यह दोनों टापू भूकंप के कारण नहीं बने थे। बाद में तेज हवाओं के कारण ये नष्ट हो गए थे। इससे पहले इसी क्षेत्र में 1945 में भूकंप के बाद टापू बना था।