17 February 2019



प्रादेशिक
मुख्यमंत्री की घोषणा के विरोध में मंत्री
27-09-2013
मुख्यमंत्री शिवराज ¨सह चौहान ने वर्ष 2009 में घोषणा की थी कि पाकिस्तान के बहावलपुर प्रांत से विस्थापित होकर सीहोर जिले में बसे बहावलपुरी किरार समाज के लोगों को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया जाएगा। उनकी इस घोषणा को पूरा करने को लेकर मंत्रिपरिषद की बैठक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अजय विश्नोई, चिकित्सा शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा और शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने विरोध किया। इन मंत्रियों का कहना था कई समाजों ने पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का अभ्यावेदन दे रखे हैं ऐसे में किसी एक समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल करना, अन्य समाजों से सीधा विरोध लेना होगा।

वरिष्ठ मंत्रियों के विरोध पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मैं केवल अपनी घोषणा को पूरा करने के लिए बहावलपुरी समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने को नहीं कह रहा हूं, बल्कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा मानते हुए इन्हें ओबीसी में शामिल करने की अनुशंसा की है।

इस पर विभागीय मंत्री विश्नोई ने कहा कि आयोग का क्या है वह तो कुछ भी अनुशंसा कर देते हैं, लेकिन हमें इस मामले में सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। विश्नोई के इस कथन पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अजय तुम ऐसा कैसे कह सकते हो। आयोग एक संवैधानिक संस्था है, उन्होंने अनुसंधान करने के बाद अनुशंसा की है। यदि फिर भी आप सबको लगता है कि इस प्रस्ताव को रद्द कर देना चाहिए तो कर दो। मुख्यमंत्री के तेवरों को भांपते हुए चिकित्सा मंत्री मिश्रा अपनी सीट से ख़़डे हुए और सभी मंत्रियों से पूछा कि बताओ इस प्रस्ताव को मंजूर करना है कि नहीं। मुख्यमंत्री की नाराजगी और मिश्रा के इशारे को भांपते हुए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने उक्त प्रस्ताव को मंजूर करने सहमति दे दी।

पंचायत कॉलोनाइजर का विरोध

ग्राम पंचायतों में कालोनाइजर नियम बनाने के प्रस्ताव का आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने एक बार फिर विरोध किया।

उन्होंने कहा कि नियमों में काफी विसंगतियां हैं। इसमें सबसे बड़ी विसंगति शहर की नगर निगम सीमा से 16 किमी के दायरे वाला नियम है।

मलैया के मुखर विरोध के चलते मुख्यमंत्री ने इसमें संशोधन कर इसे फिर से कैबिनेट में लाने को कहा। इस पर मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि जब तक उक्त नियमों को सैद्धांतिक सहमति दे दी जाए। इस पर मुख्य सचिव आर. परशुराम ने कहा कि कैबिनेट में या तो प्रस्ताव मंजूर होता है या फिर रद्द। सैद्धांतिक सहमति नहीं दी जाती।

उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर की कैबिनेट में नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर और मलैया ने इस प्रस्ताव का विरोध कर इसे वापस करवा दिया था।