17 February 2019



प्रादेशिक
मुख्यमंत्री ने अफसरों को लगाई फटकार
03-10-2013

भोपाल। पिछली दो-तीन कैबिनेट में लगातार जंबो एजेंडा पेशकर जल्दबाजी में फैसले करवाने के मामले पर मुख्यमंत्री शिवराज ¨सह चौहान बेहद खफा हैं। इस मामले में उन्होंने आला अफसरों को तगड़ी फटकार लगाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट में उन्हीं मुद्दों को लाया जाए, जो जनहित या पॉलिसी मैटर से जुडे़ हैं। विवादास्पद और साधारण मुद्दों को कैबिनेट में लाने की जल्दबाजी न करें। अगली सरकार अपनी ही आ रही है, इन्हें बाद में भी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद 3 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक को आगे के लिए टाल दिया गया है। अगली कैबिनेट बैठक 7 अक्टूबर को होने की संभावना है।

दरअसल इन दिनों मुख्यमंत्री का पूरा फोकस जन आशीर्वाद यात्रा पर है। वहीं आचार संहिता लगने के डर से सभी विभाग अपने-अपने प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगाने के लिए धड़ाधड़ प्रस्ताव भेज रहे हैं। हालात यह हैं कि हर कैबिनेट बैठक में आधा सैकड़ा से अधिक प्रस्ताव आ रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री के यात्रा से लौटने के दूसरे दिन कैबिनेट की बैठक होने के कारण वे ढंग से एजेंडे का अध्ययन नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते पिछली दो-तीन कैबिनेट की बैठकों में लगातार कुछ प्रस्तावों पर विवाद की स्थिति बन रही है। वहीं अफसर वापस हो चुके प्रस्तावों को फिर से कैबिनेट में ला रहे हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग ने नियमों को शिथिल करते हुए चतुर्थ श्रेणी के 26 कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी में पदोन्नत करने का एक प्रस्ताव 10 सितंबर की कैबिनेट में रखा था। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस पर आपत्ति जताते हुए प्रस्ताव को यह कहते हुए वापस कर दिया था कि इस तरह के विवादित प्रस्ताव बैठक में न लाए जाएं। इसके बावजूद 15 दिन बाद 26 सितंबर की कैबिनेट में इस प्रस्ताव दोबारा लाया गया। प्रस्ताव को देखते ही मुख्यमंत्री नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि जब एक बार मैं मना कर चुका हूं, उसके बावजूद इसे दूसरी बार क्यों लाया गया।

सूत्रों की मानें तो कैबिनेट के बाद मुख्यमंत्री ने आला अफसरों को बुलाकर कहा कि जल्दबाजी में कैबिनेट न कराएं। पहले मैं एजेंडों को अच्छे से देखूंगा, उसके बाद ही बैठक तय की जाए। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि उक्त प्रस्ताव को तत्कालीन मुख्य सचिव आर. परशुराम ही लेकर गए थे।

बताया जाता है कि 26 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में तीन कर्मचारी मुख्य सचिव कार्यालय के हैं। मुख्य सचिव सेवानिवृत्ति से पहले इन्हें बाबू बनाना चाहते थे।