19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
2009 के विद्रोह में 152 बांग्लादेशी सैनिकों को मौत की सजा
05-11-2013

ढाका। बांग्लादेश की एक अदालत ने 2009 के विद्रोह और शीर्ष सैन्य अधिकारियों समेत 74 लोगों के कत्लेआम के मामले में 152 सैनिकों को मौत की सजा सुनाई है। इसे सामूहिक रूप से आपराधिक मुकदमा चलाए जाने के विश्व के सबसे बड़े मामले में एक बताया जा रहा है।

इस मामले में अर्धसैनिक बल के 820 पूर्व जवानों और 26 नागरिकों पर मुकदमा चलाया गया था। ढाका के महानगरीय सत्र अदालत के जज मुहम्मद अख्तरुज्जमान ने 158 विद्रोही सैनिकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 251 अन्य को तीन से 10 साल के जेल की सजा सुनाई गई है। जबकि 271 को बरी कर दिया गया है। बांग्लादेश राइफल्स के पूर्व उप सहायक निदेशक तौहिद अहमद भी मौत की सजा पाने वालों में शामिल हैं। बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) को अब बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। अहमद विद्रोहियों के प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे। पुराने ढाका में कोर्ट परिसर के चारों ओर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। आरोपियों को पास के सेंट्रल जेल से गाड़ियों में कोर्ट लाया गया था।

अर्धसैनिक बल बॉर्डर गार्ड ने वेतन और अन्य शिकायतों को लेकर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ 25-26 फरवरी, 2009 को विद्रोह कर दिया था। प्रधानमंत्री शेख हसीना के पदभार संभालने के करीब दो महीने बाद यह विद्रोह हुआ था। इसमें बीडीआर के तत्कालीन प्रमुख मेजर जनरल शकील अहमद भी मारे गए थे। विद्रोहियों ने मारे गए या जिंदा जला दिए गए कुछ लोगों के शवों को सीवर में फेंक दिया था।

विपक्षी हड़ताल के दूसरे दिन भी हिंसाबांग्लादेश में विपक्ष द्वारा आहूत 60 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मंगलवार को दूसरा दिन था। इस दौरान देश में भड़की हिंसा में मरने वालों की संख्या चार हो गई है। विपक्ष कार्यवाहक सरकार की देखरेख में अगला आम चनाव कराने की मांग कर रहा है। टीवी रिपोर्टो में कहा गया है कि मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बोगरा में एक ट्रेन पर हमला कर दिया जिसमें नौ लोग घायल हो गए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी, आंसू गैस के गोले दागने पड़े।