16 February 2019



राष्ट्रीय
मंगलयान सही राह पर, आज बढ़ाई जाएगी कक्षा
05-11-2013

चेन्नई। भारत का मंगलयान अपने सफल प्रक्षेपण के एक दिन बाद पृथ्वी की कक्षा में सही ढंग से काम कर रहा है। वह गुरुवार को होने वाले अपने पहले कक्षा उन्नयन (ऑर्बिट रेजिंग) के लिए तैयार है। बुधवार की सुबह बगैर मोटर को ऑन किए कक्षा बढ़ाने का अभ्यास किया गया।

इसरो के प्रवक्ता ने फोन पर बताया कि हम गुरुवार को शुरुआती घंटे में (1.17 बजे) कक्षा उन्नयन की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इस अभियान के परियोजना निदेशक एस अरुणाम ने बताया कि कक्षा उन्नयन के लिए मार्स ऑर्बिटर पर लगे मोटरों को करीब 200 सेकेंड तक फायर किया जाएगा, ताकि इसकी कक्षा को 4120 किलोमीटर से 28785 किलोमीटर बढ़ाया जा सके।

अभी यह मंगलयान अपने अभियान के (मार्स ऑर्बिटर मिशन) के तहत पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने के पहले चरण में है। पृथ्वी की कक्षा से बाहर एक दिसंबर को छह बार इसकी कक्षा को बढ़ाने का काम किया जाएगा। इसमें छठी बार का कक्षा बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण होगा, जिसमें मार्स आर्बिटर को लाल ग्रह की ओर धकेला जाएगा। इसके बाद यह सूर्य के चारों ओर से होता हुआ नौ माह तक चलने वाली लाल ग्रह की यात्रा पर रवाना जाएगा।

इसरो के पीएसएलवी सी 25 ने 1,350 किलोग्राम के मंगलयान ऑर्बिटर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किए जाने के 44 मिनट बाद ही मंगलवार को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया था। इसमें 852 किलो ग्राम ईधन है। इनमें से 360 किलोग्राम ईधन छह बार कक्षा बढ़ाने में खर्च हो जाने का अनुमान है। अंतरिक्ष केंद्र से इसका प्रक्षेपण दोपहर बाद 2.38 बजे किया गया था। इस तरह 450 करोड़ रुपये की लागत वाले इस अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

प्रक्षेपण के बाद से इस अभियान का नियंत्रण बेंगलूर स्थित इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क के वैज्ञानिकों ने अपने हाथ में ले लिया है। उपग्रह पर नजर रखने की प्रणाली वाली वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू़एन2वाईओकॉम के अनुसार, मंगलयान नाइजीरिया को पार कर चुका है और दोपहर बाद एक बजकर नौ मिनट पर वह अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित चाड के ऊपर उड़ रहा था।

भारत के इस मंगलयान के लिए धरती से न्यूनतम दूरी 264.1 किलोमीटर और अधिकतम दूरी 23,903.6 किलोमीटर थी। इसका झुकाव 19.3 डिग्री था। अब यह भारत के ऊपर से नहीं उड़ेगा। इसका प्रक्षेप पथ सोमालिया के बाद अफ्रीकी महाद्वीप के बाद हिंद महासागर को पार कर जाएगा।

अंतरिक्ष में चीन है भारत से आगे

बेंगलूर। इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर का कहना है कि अंतरिक्ष में चीन पहले ही भारत से बहुत आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि यह कहें कि हम चीन के साथ होड़ करके उसे पकड़ सकते हैं..अभी तो हम खेल बुरी तरह हार चुके हैं।

नायर के अनुसार पांच साल पहले भारत और चीन लगभग बराबर थे। सिर्फ उसका मानव सहित अंतरिक्ष अभियान को छोड़कर सबकुछ प्रगति पर था। अंतरिक्ष संचार और रिमोट सेंसिंग तकनीक के क्षेत्र में तो हम चीन से भी आगे थे। पिछले पांच साल में जब भारत सो रहा था, तब चीन लगातार आगे बढ़ता गया। उसके पास दस अंतरिक्ष यात्री हैं। उसका अंतरिक्ष स्टेशन है। उनका आधा काम पूरा हो चुका है और मैं सोचता हूं कि 2015 तक वह काम करने लगेगा।