16 February 2019



राष्ट्रीय
कांग्रेस की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
01-02-2016
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन को लेकर कांग्रेस की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। कांग्रेस की याचिका में कहा गया है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के मामले में केंद्र का रुख पक्षपातपूर्ण है। पिछले शुक्रवार को केंद्र ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सफाई भी दी थी। केंद्र ने कहा था कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता है और ऐसे में पड़ोसी देश चीन से भी खतरा है। राज्यपाल की ओर से भी अपना पक्ष कोर्ट को दिया जा चुका है। अरुणाचल में कांग्रेस की सरकार थी और 60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में कांग्रेस के पास 47 सदस्य थे, लेकिन इनमें से 21 विधायकों ने बगावत कर दी और सदन के डिप्टी स्पीकर को विधायक दल का नेता चुन लिया। इन 21 विधायकों को भाजपा के 11 और 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन था। इसके साथ ही नबाम टुकी की सरकार अल्पमत में आ गई, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। अरुणाचल में सत्ता से बेदखल कांग्रेस के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा ने कहा कि वह राज्य से जुड़े कुछ मामलों की सीबीआइ या एनआइए से जांच कराएंगे। इस बारे में वह केंद्रीय एजेंसी से जल्द सिफारिश करेंगे। - कांग्रेस पर आरोप है कि उसने अपने बागी विधायकों को धमकाने के लिए प्रतिबंधित नगा उग्रवादी संगठन एनएससीएन (खापलांग) से मदद ली थी। अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए राज्यपाल ने केंद्र को जो रिपोर्ट भेजी थी, उसमें उन्होंने इस बात का जिक्र किया था। राज्यपाल राजखोवा ने जन आंदोलन कमेटी व पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल के नेताओं से कहा कि कुछ खास मामलों को एनआइए और सीबीआइ के पास जल्द भेजा जाएगा। दोनों संगठनों के नेताओं ने शनिवार को राजभवन में राजखोवा से मुलाकात की थी। दोनों संगठनों को उन्होंने बताया कि पिछले दिनों राज्य में प्रशासन को पंगु करने व कानून-व्यवस्था भंग करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। राष्ट्रपति शासन के लिए केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में राज्यपाल ने राज्य विधान सभा परिसर में तालाबंदी व कानून-व्यवस्था भंग होने को संवैधानिक मशीनरी के फेल होने की मिसाल के तौर पर गिनाया था। इसी रिपोर्ट में उन्होंने आशंका जताई थी कि सत्ताधारी कांग्रेस ने बागी विधायकों पर दबाव बनाने के लिए एनएससीएन (खापलांग) से मदद ली। माना जा रहा है कि राज्यपाल राजखोवा जिन मामलों की सीबीआइ या एनआइए से जांच कराने की बात कर रहे हैं, उनमें यह भी शामिल हो।