18 February 2019



खेलकूद
यह रहा टीम इंडिया के पतन का कारण
02-04-2012
विजय का गुरुरवर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद खिलाड़ियों में गुरूर दिखने लगा। सचिन वेस्टइंडीज दौरे पर नहीं गए। धोनी ने भी वनडे सीरीज के दौरान आराम किया। जहीर, सहवाग ने फिटनेस को कमतर माना। अंतरराष्ट्रीय मैच से वापसी की। नाकाम रहे। यह अंदाज साल भर दिखा। खिलाड़ी प्रदर्शन सुधारने के बजाय बहाने गिनाते रहे। एकता नहींटीम पर एकजुट होकर नहीं खेलने का आरोप लगने लगा है। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और वीरेंद्र सहवाग टीम की एकता बनाए रखने में असफल रहे हैं। सहवाग के असहयोगात्मक रवैये के बारे में ऑस्ट्रेलियन अखबार ने काफी कुछ लिखा भी है। स्थिति यह है कि अपनी ही गलती से सहवाग इन दिनों टीम से बाहर हैं।संतुलन नदारदइंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद एशिया कप में भी टीम संतुलित नहीं थी। एशिया कप में कप्तान ने रवींद्र जडेजा और यूसुफ पठान को प्लेइंग इलेवन में रखा। सुनील गावसकर का कहना है कि धोनी को पांचवें पूर्ण गेंदबाज को प्लेइंग इलेवन में लेना चाहिए था न कि जडेजा और पठान को साथ-साथ खिलाना था। फिटनेस भारतीय सितारों में फिटनेस की कमी नजर आ रही है। वीरेंद्र सहवाग और जहीर खान पूरी तरह से फिट नहीं होने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया में खेलते रहे। टीम के अन्य सितारे भी फिटनेस पर ध्यान देने के बजाय ऑस्ट्रेलिया में आराम फरमाते रहे या शॉपिंग करते रहे। खराब गेंदबाजी नेटवेस्ट ट्रॉफी और सीबी सीरीज में हमारी तेज गेंदबाजी कमजोर नजर आई। नेटवेस्ट ट्रॉफी में आरपी सिंह और मुनाफ व सीबी सीरीज में विनय, जहीर, इरफान और उमेश की ढीली गेंदों को जमकर नसीहत दी गई। मददगार पिचों पर भी हमारे गेंदबाज दिशाहीन गेंदबाजी करते रहे। धन पर है मनक्रिकेट में धन इस कदर हावी है कि कई कमर्शियल कांट्रेक्ट होने के कारण खिलाड़ी चोट छुपाकर खेलते हैं। आईपीएल नजदीक आता है तो खिलाड़ी चोट से बचने के लिए मन लगाकर नहीं खेलते हैं। उनकी प्राथमिकता आईपीएल के लिए फिट रहना व उसमें खेलना हो जाता है।जज्बे की कमीवर्ल्ड कप जीत का जुनून फिर से पैदा करना जरूरी है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो टेस्ट सीरीज में बड़ी हार के बाद टीम का मनोबल टूट गया था। एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बाद जीत का जज्बा लौट आना चाहिए। यह और बात है कि बांग्लादेश से हमारी टीम हार गई और हम एशिया कप से बाहर हो गए। चयन में भेदभावटीम इंडिया के चयन में भेदभाव का आरोप लगता ही रहता है। चयनकर्ता युवाओं को एकदम से मौका देने से भी कतराते रहते हैं। रणजी ट्रॉफी में एक सत्र में एक हजार से ज्यादा रन बनाने वाले राजस्थान के रॉबिन बिष्ट को कम से कम बांग्लादेश में एशिया कप के लिए चुना जा सकता था। उसी प्रकार अजिंक्य रहाणो को कभी अंदर और कभी बाहर कर दिया जाता है। चयनकर्ताओं की तीखी आलोचना हो रही है।टेस्ट मैच में प्रदर्शनवर्ल्ड कप के बाद भारत ने अब तक चार सीरीज में कुल 14 टेस्ट मैच खेले। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे में लगातार 8 टेस्ट हारे।