21 February 2019



प्रमुख समाचार
श्रमिकों के हकों का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
04-02-2016
भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि श्रमिकों के हकों का संरक्षण करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रमिकों की पंचायत बुलाकर उनकी राय से उनके कल्याण की योजनाओं को और सशक्त बनाया जायेगा। योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिये श्रम विभाग के सभी रिक्त पद की आगामी तीन वर्ष में पूर्ति की जायेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान श्रम विभाग की योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। विभागीय मंत्री श्री अंतरसिंह आर्य, मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा, प्रमुख सचिव श्रम श्री एम.के. वार्ष्णेय, प्रमुख सचिव वित्त श्री आशीष उपाध्याय, श्रमायुक्त श्री के.सी. गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल श्रम को रोकने के लिये सतत निरीक्षण किया जाये तथा बाल श्रमिकों के समुचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाये। बंधुआ मजदूरी पर सख्ती बरती जाये। साथ ही असंगठित श्रमिकों के कल्याण की योजनाएँ बनाई जाये। यह निर्णय लिया गया कि कारखाना अधिनियम में एकमुश्‍त दस वर्ष का लायसेंस लेने पर फीस में छूट दी जायेगी। साथ ही श्रमिकों द्वारा सायकिल खरीदी पर अनुदान बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों के कल्याण की जो योजनाएँ जरूरी हैं उनमें सुधार कर और सशक्त बनाया जायेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रमिक लाभान्वित हो सकें। जो योजनाएँ प्रासंगिक नहीं है उनका स्वरूप बदल दिया जायेगा। श्रमिकों के कौशल प्रमाणीकरण कार्य में गति लायी जाये। बैठक में बताया गया कि श्रम कल्याण मंडल के अंतर्गत श्रमिकों को इस वर्ष दिसम्बर माह तक 2 करोड़ 62 लाख रूपये का हित लाभ वितरित किया गया है। इसके अलावा निर्माण मंडल द्वारा प्रसूति सहायता योजना में 17 हजार 639 श्रमिकों को 10 करोड़ 26 लाख रूपये, विवाह सहायता में 10 हजार 535 श्रमिकों को 20 करोड़ 99 लाख रूपये, शिक्षा सहायता में तीन लाख 17 हजार 480 विद्यार्थियों को 28 करोड़ 73 लाख रूपये, मेधावी छात्रों को नगद पुरस्कार में 61 हजार 661 को 7 करोड़ 22 लाख रूपये और दुर्घटना सहायता योजना में 713 श्रमिकों को 3 करोड़ 49 लाख रूपये वितरित किये गये। इसी तरह कौशल प्रशिक्षण योजना में 12 हजार 390 श्रमिक को प्रशिक्षित किया गया तथा 5000 श्रमिकों का कौशल प्रमाणीकरण किया गया। श्रम कल्याण मंडल की विभिन्न योजनाओं में इस वर्ष 73 हजार 210 श्रमिकों को 2 करोड़ 61 लाख 95 हजार 497 रूपये की सहायता दी की गई।