16 February 2019



राष्ट्रीय
यादव सिंह को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया
04-02-2016
नई दिल्ली। आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में आरोपी यादव सिंह को सीबीआइ ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर अरबो रुपयों का घोटाला करने का आरोप है। यादव सिंह की आज गाजियाबाद की विशेष सीबीआइ अदालत में पेशी है। यादव सिंह का रसूख ही था कि सीबीआइ को उन पर हाथ रखने से पहले कई फाइलें खंगालनी पड़ी। यादव सिंह पर यूपी के सबसे अमीर विभाग नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहते हुए कई सौ करोड़ रुपये घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटने का आरोप है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी के इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन पर बड़ी भूमिका होती थी। जब उसके ठिकाने पर इनकम टैक्स विभाग का छापा पड़ा था तब वहां उसके पास अरबों रुपये के बंगले, गाड़ियां, शेयर, जेवरात, जमीन और कंपनियों का पता चला था। मूलरूप से यादव सिंह आगरा के रहने वाले हैं और इलैक्ट्रिकल इंडीनियरिंग में उन्होंने डिप्लोमा ले रखा है। उन्होंने साल 1980 में बतौर जूनियर इंजीनियर नोएडा अथॉरिटी में नौकरी शुरू की थी। इसके बाद जब साल 1995 में बसपा पार्टी ने प्रदेश में सरकार बनाई तो पहली बार मुख्यमंत्री बनीं मायावती ने यादव सिंह को बतौर प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रमोट कर दिया। खास बात ये थी कि यादव सिंह के पास इस पद के लायक कोई डिग्री भी नहीं थी। इस पद के लायक डिग्री हासिल करने के लिए उन्हें वक्त भी दिया गया। इसके बाद साल 2002 में उन्हें नोएडा में चीफ मेंटिनेंस इंजीनियर जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया गया। इसके बाद नौ साल तक वो इसी पद पर रहे। साल 2014 में आयकर विभाग ने पहली बार उनके ठिकानों पर छापा मारा और उन्हें निलंबित कर दिया गया।
दरअसल यादव सिंह के अमीर और ताकतवर बनने की कहानी तब शुरू हुई जब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी सत्ता में थी और मायावती मुख्यमंत्री। इस दौरान ही यादव सिंह को नोएडा अथॉरिटी का चीफ इंजीनियर नियुक्त किया गया। इसी समय उन पर आरोप लगने शुरू हो गए कि इस पद पर रहते हुए उन्होंने जमकर घोटाला किया और पैसे कमाए। इसके बाद जब समाजवादी पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई को लगा कि यादव सिंह पर शिकंजा कसा जाएगा। राज्य सरकार ने सिंह के खिलाफ सीबीसीआइडी जांच भी कराई लेकिन वास्तव में वो एक दिखावा था और राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण जांच एजेंसी ने यादव सिंह को क्लीन चिट दे दी। सपा सरकार में ही यादव सिंह को नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी की भी जिम्मेदारी मिल गई। यादव सिंह पर आरोप है कि उन्होंने यूपी के सबसे अमीर विभाग नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहते हुए कई सौ करोड़ रुपये घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटे। ये सारे टेंडर उन्होंने महज आठ दिनों में बांट दिए थे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन बड़ी भूमिका होती थी। साल 2011 के दिसंबर महीने के लगातार 8 दिनों में ही इन टेंडर को पास करने के लिए यादव सिंह ने कागजातों पर दस्तखत किए थे। जिन कंपनियों को टेंडर दिए गए थे उनमें से कई ने साइट पर काम बहुत पहले ही शुरू कर दिए थे और दिसंबर तक करीब 60 फीसदी काम भी पूरा कर दिया गया था। आरोप हैं कि 21.90 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट जेएसपीएल कंस्ट्रक्शन को दिया गया था। तिरुपति कंस्ट्रक्सन को 25.50 करोड़ रुपये का टेंडर और एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर्स को 34.87 करोड़ रुपए का टेंडर बिना यादव सिंह के दस्तखत के ही दे दिया गया था।