18 February 2019



प्रादेशिक
केन्द्रीय क्लाइमेट स्मार्ट विलेज परियोजना में प्रदेश के 60 गाँव चयनित
20-07-2017


जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से किसानों और फसल उत्पादन को बचाने के लिये केन्द्र शासन द्वारा आरंभ क्लाइमेट स्मार्ट विलेज परियोजना में प्रदेश के 3 जिलों के 60 गाँव का पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में चयन किया गया है। पर्यावरण मंत्री श्री अन्तर सिंह आर्य ने आज एप्को में परियोजना की राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के गाँव के चयन के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का प्रदेश की जनता की ओर से आभार प्रगट किया। विधायक श्री नारायण प्रसाद त्रिपाठी एप्को के कार्यपालन संचालक श्री अनुपम राजन भी मौजूद थे। परियोजना में चयनित सीहोर, राजगढ़ और सतना जिले के 20-20 गाँवों के लिये केन्द्र द्वारा 24 करोड़ 87 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

पर्यावरण मंत्री श्री आर्य ने कार्यशाला में संबंधित जिलों के भाग ले रहे जनपद अध्यक्ष, कार्यपालन अधिकारी, पंचायतों के सरपंच और सचिव को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्रदेश में ही नहीं देश में भी अपने-अपने गाँव को मॉडल क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के रूप में स्थापित करें। पर्यावरण बचाने के लिये पौध-रोपण बहुत जरूरी है।

विधायक श्री त्रिपाठी ने किसानों का आव्हान करते हुए कहा कि वे सोलर पम्प का उपयोग करें। देश में मध्यप्रदेश के स्मार्ट विलेज को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करें। खाद, बीज, बिजली, पानी मिलने से किसान मजबूत हो जायेगा। उन्होंने बताया कि वे शीघ्र ही अपने क्षेत्र मैहर में 50 हजार पौध रोपण करवा रहे हैं।

कार्यपालन संचालक राजन श्री राजन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से सर्वाधिक प्रभावित किसान ही है। असंतुलित वर्षा और हानिकारक गैस के उत्सर्जन से फसल, उत्पादन, उत्पादकता और खाद्यान्न प्रजाति प्रभावित हो रही है। पृथ्वी की सतह के एक डिग्री तापमान बढ़ने के साथ ही फसल उत्पादन में 10 प्रतिशत की कमी आ जाती है। दक्षिण अफ्रीका में तापमान बढ़ने से मुख्य फसल मक्का उत्पादन में 30 प्रतिशत की कमी आई है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये सही खाद, बीज, ऊर्जा प्रबंधन आदि पर काम करने की जरूरत है।

केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एनएएफसीसी के तहत क्लाइमेट स्मार्ट विलेज देश की पहली परियोजना है जो पूर्णत: केन्द्रीय अनुदान आधारित है। क्लाइमेट स्मार्ट विलेज मिट्टी और जल के संरक्षण, फसल की सूखा सहनशील किस्मों की खेती, कृषि वानिकी द्वारा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने तथा मौसम पूर्वानुमान आधारित कृषि की नवीन पद्धतियों पर आधारित परियोजना है।