16 February 2019



खेलकूद
थापा लंदन ओलंपिक का टिकट कटाने से केवल एक जीत दूर
10-04-2012

नई दिल्ली। युवा भारतीय मुक्केबाज शिवा थापा ने सोमवार को पूर्व ओलंपिक रजत पदकधारी थाईलैंड के वोरापोज पेचकूम को 16-10 से हराकर उलटफेर करते हुए कजाखस्तान के अस्ताना में एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर के सेमीफाइनल में प्रवेश किया और अब वह लंदन ओलंपिक का टिकट कटाने से केवल एक जीत दूर हैं। युवा ओलंपिक खेलों के इस 18 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज ने अपने दूसरे सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में थाईलैंड के 30 वर्षीय पर शानदार जीत दर्ज की जो 2006 में एशियाई कांस्य पदक भी जीत चुके हैं। असम के मुक्केबाज थापा ने कहा, 'मेरी पहली बाउट में मेरा शरीर थोड़ा अकड़ा था लेकिन इस बाउट में सब ठीक रहा। अब मेरा शरीर ठीक है।' थापा ने अपने पहले सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के फाइनल में विश्व चैंपियन को हराकर सनसनी फैला दी थी, जिसमें उसने स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने कहा, 'मैं आक्रामक था और मैं अपनी रणनीति के अनुसार खेला। मैंने तैयारियों के लिए पिछले टूर्नामेंट की रिकार्डिग देखी थी। मैं जानता था कि मैं उसे हरा सकता हूं और मैं खुश हूं कि मैंने ऐसा किया।' अब फाइनल के लिए थापा का सामना जापान के सांतोषी सिमिजू से होगा जिन्होंने उत्तरी कोरिया के मयोंग किम को 23-10 से परास्त किया। कल आराम का दिन होगा। अगर यह भारतीय मुक्केबाज इस राउंड में जीत जाता है तो वह लंदन ओलंपिक के लिए भी अपना टिकट कटा लेगा। लेकिन अगर इसमें उसे हार मिलती है तो उसे प्रार्थना करनी होगा कि उसका प्रतिद्वंद्वी स्वर्ण पदक जीत जाए क्योंकि चैंपियन बनने वाले मुक्केबाज के खिलाफ सेमीफाइनल में हारने वाले मुक्केबाज को ही लंदन ओलंपिक का कोटा मिलता है। थापा ने शुरुआती राउंड में 5-3 से बढ़त बना ली थी जो प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज से कहीं ज्यादा आक्रामक थे। दूसरे राउंड में भी यही क्रम जारी रहा। अंतिम राउंड में वह थोड़ा धीमा हो गया और स्कोर 4-5 रहा लेकिन पिछले राउंड का स्कोर इस भारतीय को जीत दिलाने के लिए काफी था। राष्ट्रीय कोच गुरबक्श सिंह संधू ने कहा, 'हमने पेचकूम की पिछली बाउट देखने के बाद रणनीति बनाई थी। वह शुरुआती राउंड में आक्रामक था और यह रणनीति कारगर रही।' उन्होंने कहा, 'वह काफी प्रतिभाशाली मुक्केबाज है।' पहले राउंड में बाई मिलने के बाद थापा ने अपनी पहली बाउट में मोहम्मद खैबर नूरीस्तानी को 14-7 से हराया था। इस तरह पांच मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं जिसमें से केवल विजेंदर सिंह [75] ही लंदन ओलंपिक का टिकट कटा पाए हैं क्योंकि ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले इस मुक्केबाज के वर्ग में क्वालीफाई करने के लिए चार कोटे थे। सेमीफाइनल में पहुंचने वाले अन्य भारतीय सुमित सांगवान [81] और एशियाई खेलों के रजत पदकधारी मनप्रीत सिंह [91 किग्रा] और परमजीत समोटा [91 किग्रा से अधिक] हैं। सुमित के लिए भी हालात थापा की तरह हैं क्योंकि इनके वर्ग में केवल तीन कोटे ही बचे हैं जबकि मनप्रीत और समोटा को अगर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है तो उन्हें स्वर्ण पदक जीतना ही होगा।