21 February 2019



मनोरंजन
प्रकाश झा उलझे
13-04-2012

भोपाल। भोपाल की जमीन पर राजनीति एवं आरक्षण जैसी फिल्मों के फिल्मांकन के बाद अपनी नई फिल्म चक्रव्यूह के लिए यहां आए निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा एवं उनकी यूनिट प्रदेश के बैगा आदिवासियों को काम देने का वायदा कर 600 किलोमीटर दूर डिण्डोरी से यहां बुलाने के बाद काम नहीं देने और उन्हें खाना-पानी तक नहीं पूछने की वजह से विवादों में घिर गई है। हालांकि प्रकाश झा ने उन आदिवासियों को 25 हजार रुपयों का भुगतान भी किया और कहा कि बातचीत ठीक से न समझ पाने के कारण ये सब हुआ। रंगमंच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि झा की यूनिट ने फिल्मांकन में काम देने का वायदा कर डिण्डोरी के राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बीस बैगा आदिवासी कलाकारों को कल भोपाल बुलाया था, लेकिन यहीं दूसरा गु्रप मिलने के कारण उन्होंने इनसे काम लेने से मना कर दिया। इसे लेकर इन कलाकारों एवं यूनिट के सदस्यों के बीच झड़प भी हुई और यहां तक कि उन्हें खाना-पानी के लिए भी नहीं पूछा गया। एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाले संजय यादव ने बताया कि रंगमंच के कुछ कलाकारों एवं उनके एनजीओ ने इन आदिवासी कलाकारों को मामूली सही, लेकिन आर्थिक मदद मुहैया कराई। इस मदद से उन्हें कल देर रात दाल-चावल नसीब हो सके और चंदे से मिले 1700 रुपए से इन्हें रात गुजारने के लिए छत मिल सकी। उधर, चक्रव्यूह की यूनिट के एक अधिकारी ने कहा कि सवा लाख रुपए में बात हुई थी, लेकिन बीस हजार रुपए प्रतिदिन पर भोपाल में ही काम करने वाले लोग मिल गए। हमने विधिवत उनको बता दिया था। सरकारी तौर पर यहां बताया गया कि इन सभी आदिवासी कलाकारों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आज मुलाकात की। दल के सदस्यों ने चौहान को बताया कि एक निजी संस्थान ने उन्हें नृत्य के लिए बुलाकर कार्यक्रम नहीं कराया। आने-जाने, रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था भी नहीं की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल नर्तक दल के भोजन एवं उनके गांव तक जाने के प्रबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस दल को लाने वाले से कहा कि भविष्य में किसी भी आदिवासी नर्तक दल को बगैर पुख्ता निमंत्रण तथा सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए बिना इस तरह नहीं लाया जाए। दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग अध्यक्ष मानक अग्रवाल ने एक बयान में आदिवासी कलाकारों से धोखाधड़ी एवं अपमानजनक व्यवहार के लिए झा के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के तहत तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। उल्लेखनीय है कि कई फिल्मों, टेलीविजन एवं राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय समारोहों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके इन बैगा आदिवासी लोक कलाकारों को राज्य सरकार ने 18 अप्रैल को शिवपुरी में आयोजित शहीद तात्या टोपे बलिदान दिवस पर प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया है और कहा था कि इसके लिए इन्हें तीस हजार रुपए दिए जाएंगे, जबकि फिल्म यूनिट ने इन्हें 250 रुपए प्रति कलाकार दिहाड़ी पर काम करने के लिए बुलाया था। फिल्मकार प्रकाश झा से इस बारे में सम्पर्क करने पर उन्होंने कहा कि जो हुआ वह बेहद दुखद है, लेकिन हमारी यूनिट की तरफ से बैगा आदिवासी लोक कलाकारों को फिल्म में काम देने की कोई पुष्टि नहीं की गई थी। उन्हें यहां लेकर आने वाला स्थानीय व्यक्ति बिना पुष्टि के यहां लेकर आ गया। उन्होंने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री चौहान ने भी उनसे बातचीत की है और उसके बाद हमने इन कलाकारों को 25 हजार रुपए का भुगतान कर दिया है। उन्होंने कहा कि केवल भ्रम पैदा होने की वजह से यह आदिवासी कलाकार इतनी दूर से भोपाल तक आए। हमने उन्हें बुलावा नहीं भेजा था। झा ने कहा कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद बैगा आदिवासी नर्तक दल को राशि का भुगतान कर दिया गया है और हम उन्हें फिल्म में भी सम्मानपूर्वक काम दे रहे हैं।