19 February 2019



खेलकूद
सौरव गांगुली की हो रही है आलोचना
08-05-2012

नयी दिल्‍ली. 12 पारियों में केवल 246 रन । पिछले पांच मैचों में लगातार हार । तो क्‍या टीम इंडिया के पूर्व कप्‍तान सौरव गांगुली का बल्‍ला और रणनीति की समझ दोनों ही चुक गये हैं। क्‍या बंगाल टाइगर जिसे रन उगलते बल्‍ले और जुझारू तेवरों के चलते विपक्षी टीम के जबड़ों से जीत खींच कर लाने के लिए जाना जाता था उसकी क्षमता ढलान पर आती दिखाई पड़ रही है। कम से कम आंकड़े तो यही कहानी बयां कर रहे हैं। दादा के नाम से मशहूर गांगुली के परफार्मेंस पर अंगुलियां उठ रहीं है। डेक्‍कन चार्जर्स के खिलाफ कटक में खेले गये मैच या फिर पुणे में मुंबई इंडियन्‍स के खिलाफ हो अथवा खुद उनके शहर कोलकाता के ईडन गार्डेन में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ खेला गया मैच हो । जानकारों के अनुसार इन मैचों से यह बात पानी की तरह साफ दिखती है कि दादा स्‍ट्राइक रोटेट नहीं कर पा रहे हैं। या फिर रायल चैलेंजर्स बेंगलूर के डेनियल विटोरी या डेकन चार्जर्स के कुमार संगकारा की तरह अपनी जगह दूसरे खिलाडि़यों को उचित मौका नहीं दे पा रहे हैं। दादा की उम्र भी उनके खिलाफ जा रही है। चालीस के पास पहुंच चुके सौरव की उम्र का असर उनकी दौड़ पर दिखने लगा है। यह बात अलग है अपनी पीक के दिनों में भी गांगुली की विकेटों के बीच सुस्‍ती बरतते थे। ऐसा लगता है कि कलमों के बाल पकने के साथ ही सुस्‍ती का दायरा और बढ़ गया है।वजह जो भी लेकिन आईपीएल में दूसरी पारी खेल रही सहारा इंडिया के स्‍वामित्‍व वाली पुणे वॉरियर्स को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। टीम के दूसरे सबसे महत्‍वपूर्ण खिलाड़ी युवराज अपनी बीमारी की वजह से टीम से बाहर हैं लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि अगले साल वह इस टूर्नामेंट में खेलने के लिए पूरी तरह फिट हो जाएं। ऐसे में हो सकता है कि अगर यही सिलसिला कायम रहा तो गांगुली को उनके लिए जगह खाली करनी पड़ जाये।सौरव की सफाई  हालांकि दादा इन बातों से इत्‍तेफाक नहीं रखते। वह टीम की हार का ठीकरा इस बात पर फोड़ते हैं कि टीम में किलर इंस्टिंक्‍ट की कमी है। सौरव का कहना है कि पिछले तीन मैच वे बहुत कम अंतर से हारे। इनमें उन्‍हें 13, 1, और 7 रन से हार का सामना करना पड़ा। यह बहुत मामूली अंतर है। इससे यह भी समझा जा सकता है कि टीम अच्‍छा प्रदर्शन कर रही है लेकिन फिनिशंग के मामले में थोड़ा पीछे रह जाती है। सौरव का मानना है कि टीम ने जीत का अवसर तो बना ही लिया था लेकिन आखिरी समय में टीम का हौसला टूट गया। टीम शेष बचे चार मैचों में अच्‍छा खेल दिखाये तो पांसा पलट भी सकता है। इसके लिए टीम को एकजुटता बनाये रखते हुए खुलकर खेलना होगा तभी इस समस्‍या से पार पाया जा सकता है।