17 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की मुश्किलें और बढ़ी
09-05-2012

इस्लामाबाद। अवमानना मामले में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 77 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया। इस आदेश से प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आदेश से साफ है कि गिलानी पर पांच साल के लिए संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराने का खतरा मंडरा रहा है। इससे पहले न्यायमूर्ति नसीर-उल-मुल्क की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले में 26 अप्रैल को संक्षिप्त आदेश जारी करते हुए भी ऐसे संकेत दिए थे।
शीर्ष अदालत ने विस्तृत आदेश में 10 जनवरी को जारी किए गए अपने पूर्व के आदेश का उल्लेख किया है। इसके अनुसार अवमानना का दोषी ठहराए जाने पर संविधान के प्रावधानों के तहत कम से कम पांच साल के लिए मजलिस-ए-शूरा संसद या प्रांतीय असेंबली के लिए निर्वाचित या चुने जाने और सदस्य बने रहने के अयोग्य करार दिया जा सकता है। सात न्यायाधीशों की पीठ ने विस्तृत आदेश में 56 वर्षीय प्रधानमंत्री को दोषी ठहराने के कारण बताते हुए उनके खिलाफ चलाए गए मुकदमे के दौरान दिए गए साक्ष्यों का विश्लेषण भी किया है। विस्तृत आदेश में कहा गया है, ‘पाकिस्तान के सर्वोच्च कार्यपालक ने जानबूझकर और लगातार देश की सर्वोच्च अदालत के स्पष्ट निर्देशों की अवज्ञा की है। इस तरह की स्पष्ट और लगातार अवज्ञा इतने उच्च स्तर पर अवमानना है जो न्याय के प्रशासन के लिए अहितकर है और यह न्यायपालिका का मजाक बनाता है।पूर्व विधि मंत्री वसी जाफर के अनुसार अब अब गिलानी का मामला नेशनल असेंबली या संसद के निचले सदन के स्पीकर के पास जाएगा। स्पीकर फैसला करेंगे कि मामले को मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजा जाना चाहिए या नहीं।यदि स्पीकर मामले को सीईसी को भेजते हैं तो चुनाव आयोग अयोग्य ठहराने के मुद्दे पर फैसला करेगा। मौजूदा नियमों के तहत स्पीकर के पास अयोग्यता के मुद्दे पर विचार करने के लिए 30 दिन और चुनाव आयोग के पास फैसला करने के लिए 90 दिनों का वक्त होगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा खोलने के लिए स्विट्जरलैंड सरकार को पत्र नहीं लिखने के कारण 26 अप्रैल को अवमानना का दोषी करार देते हुए 30 सेकंड की सांकेतिक सजा सुनाई थी। इसके बाद से विपक्ष उनसे लगातार इस्तीफे की मांग कर रहा है। हालांकि इस मांग को खारिज करते हुए गिलानी मंगलवार को ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए।65 फीसदी जनता चाहती है इस्तीफा इस्लामाबाद। पाकिस्तान की 65 प्रतिशत जनता न्यायालय की अवमानना के दोषी करार दिए गए प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी का इस्तीफा चाहती है। जियो न्यूज की ओर से कराए गए सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है। हालांकि सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। 36 प्रतिशत लोगों ने न्यायालय के फैसले पर खुशी जताई। 32 फीसदी लोगों ने दुख जताया और सर्वेक्षण में शामिल 31 प्रतिशत लोगों की इस बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल 50 प्रतिशत मतदाताओं ने बताया कि वे कोर्ट के आदेश के पक्ष में हैं, जबकि 39 प्रतिशत ने इसका विरोध किया। सर्वेक्षण में शामिल 40 प्रतिशत लोगों ने कहा कि यदि गिलानी को छह माह कैद की सजा दी जाती तो वे ज्यादा खुश होते, जबकि केवल छह प्रतिशत का कहना था कि ऐसा होने की सूरत में वह विरोध-प्रदर्शन करते। 45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इस फैसले के बाद उनकी नजर में सुप्रीम कोर्ट का मान-सम्मान बढ़ा है। वहीं, 26 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे सुप्रीम कोर्ट की छवि खराब हुई है। जियो न्यूज ने कहा है कि करीब 2500 पुरुषों और महिलाओं से बातचीत पर आधारित यह सर्वेक्षण पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि समाचार चैनल ने यह नहीं बताया है कि कब और कहां किया गया।