19 February 2019



खेलकूद
सचिन तेंदुलकर पर दबाव बरकरार
11-05-2012

न्यूयार्क। अपेक्षाओं पर खरे उतरने और अपना स्तर बरकरार रखने के दबाव में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अब भी रात को ठीक से सो नहीं पाते हैं और इसी बेचैनी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। तेंदुलकर ने टाइम मैगजीन को दिए साक्षात्कार में कहा कि मुझे नहीं लगता कि ऎसी कोई सुबह रही होगी जब मैंने महसूस किया हो कि मुझ पर यह जिम्मेदारी थी और मुझे उस अपेक्षा पर खरा उतरना था। मेरी नींदे यह सोचकर उड़ जाती है कि मैं कैसे अपनी अपेक्षाओं पर खरा उतर पाऊंगा। जो मानक मैंने तय किए हैं उन पर कायम कैसे रह पाऊंगा। उन्होंने कहा कि मैं कैसा प्रदर्शन करूंगा, यह बेचैनी ही मुझसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराती है जो अच्छा संकेत है। सचिन ने कहा कि वह अपने भविष्य के बारे में बहुत आगे की नहीं सोचते। उन्होंने कहा कि मैं मैच दर मैच रणनीति बनाता हूं। बहुत आगे की नहीं सोचता हूं। मैं ज्यादा से ज्यादा अगले टूर्नामेंट या सीरीज के बारे में सोचता हूं। मेरा भरोसा कदम दर कदम चलने पर है। बदलता रहता था करवटें इस अमरीकी प्रकाशन ने इस सप्ताह आने वाले अंक के लिए सचिन का साक्षात्कार किया है। सचिन ने बताया कि अपने करियर की शुरूआत में मैं मैच से पहली रात को करवटें बदलता रहता था। अब मुझे पता है कि यह स्वभाविक है। मैं उठकर टीवी देखने या कुछ और करने लगता हूं। मेरा अवचेतन मानस इसी तरह से मैच के लिए खुद को तैयार करता है। यह खुद को जानने की बात है और अब मैं खुद को बेहतर समझता हूं।बेटे को है क्रिकेट से प्यार सचिन ने कहा कि उनके 11 वर्ष के बेटे अर्जुन को क्रिकेट से प्यार है जो बचपन में दिल से शुरू होकर बड़े होने पर दिमाग तक चला जाता है। लेकिन यह उनके अर्जुन का फैसला होगा कि उसे क्रिकेट खेलना है या नहीं। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि अर्जुन मैदान पर होने का मजा ले और यह नहीं सोचे कि वह कितने घंटे अभ्यास करता है। मैदान पर होना ही अपार संतोष की बात है।